मुख्य सामग्री पर जाएँ

🗺️ सीमा विवाद

Boundary Dispute

⏱ SLA: 120 दिनधारा 130 — CG भू-राजस्व संहितातहसीलदार

सीमा विवाद

दो ज़मीनों के बीच सीमा को लेकर विवाद — पटवारी सर्वेक्षण से निपटारा

वह भूस्वामी जिसकी ज़मीन की सीमा पर विवाद हैसरकारी ज़मीन की सीमा से प्रभावित व्यक्तिदोनों पड़ोसी भूस्वामी मिलकर

सीमा विवाद क्या है?

जब दो भूस्वामियों के बीच यह विवाद हो कि उनकी ज़मीन की सीमा (मेड़) कहाँ है — तो सीमा विवाद का मामला तहसील में दर्ज होता है। पटवारी मौके पर सर्वेक्षण करेगा और तहसीलदार दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद निर्णय देगा।

कौन आवेदन कर सकता है?

  • वह भूस्वामी जिसकी ज़मीन की सीमा पर विवाद है
  • सरकारी ज़मीन की सीमा से प्रभावित व्यक्ति
  • दोनों पड़ोसी भूस्वामी मिलकर

आवश्यक दस्तावेज़

दस्तावेज़
📄खसरा नक्शा (नक्शा-ब)

दोनों ज़मीनों का

📄B1 की नक़ल

आपकी ज़मीन का अधिकार अभिलेख

📄सीमा का विवरण (लिखित)

विवाद किस बिंदु पर है

📄गवाहों के नाम और पते

जो सीमा के गवाह हों

📄फोटो साक्ष्य

अगर अतिक्रमण हो

📄पहचान पत्र

💡 मूल दस्तावेज़ के साथ 2 स्व-प्रमाणित फोटोकॉपी साथ लाएँ।

पूरी प्रक्रिया — चरण दर चरण

01

आवेदन दर्ज करें

सीमा विवाद की लिखित शिकायत तहसील में दर्ज करें।

02

दोनों पक्षों को नोटिस

तहसीलदार दूसरे पक्ष को नोटिस भेजेगा।

03

पटवारी सर्वेक्षण

पटवारी मौके पर जाकर सर्वेक्षण और रिपोर्ट देगा।

04

सुनवाई और गवाही

दोनों पक्ष और गवाह तहसीलदार के सामने अपना पक्ष रखें।

05

निर्णय

120 दिनों में तहसीलदार का सीमा-निर्धारण आदेश।

विस्तृत जानकारी

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देरी हो रही है? यहाँ शिकायत करें

120 दिन बाद SDM को लिखित शिकायत

कलेक्टर कार्यालय

janshikayat.cgstate.gov.in

आदेश से असंतुष्ट हैं? अपील का अधिकार

तहसीलदार के आदेश से 30 दिनों में SDM → कलेक्टर → राजस्व मंडल।

महत्वपूर्ण सुझाव

पुराने खसरा नक्शे और B1 संभाल कर रखें।

गवाहों के नाम पहले से तैयार रखें।

पटवारी सर्वेक्षण के दिन ज़रूर उपस्थित रहें।

अपने सीमा विवाद मामले की स्थिति जानें

प्रकरण क्रमांक (RC/X/YYYY/XXXX) से तुरंत स्थिति जाँचें