नामांतरण क्या है? — ज़मीन का नाम बदलवाने की पूरी जानकारी
28 मई 2026 · 5 मिनट पढ़ें
🏠 नामांतरण क्या होता है?
जब किसी ज़मीन का मालिक बदलता है — मृत्यु, खरीद-बिक्री, वसीयत या उपहार से — तो सरकारी अभिलेख (खसरा) में नया नाम दर्ज करवाना होता है। इसी को नामांतरण कहते हैं।
बिना नामांतरण के आप कानूनी मालिक नहीं माने जाते — बेचना, बाँटना, या बैंक लोन लेना मुश्किल हो जाता है।
📋 कब होता है नामांतरण?
मृत्यु के बाद
माता-पिता या पति/पत्नी की मृत्यु के बाद उत्तराधिकारियों के नाम पर।
खरीद-बिक्री
रजिस्ट्री के बाद नए खरीदार का नाम खसरा में दर्ज।
वसीयत
वसीयत में जिसका नाम — उसके नाम पर।
उपहार (Gift Deed)
पंजीकृत उपहार पत्र के आधार पर।
📂 ज़रूरी दस्तावेज़
- खसरा/B1 की नक़ल (पटवारी या bhuiyan.cg.nic.in से)
- मृत्यु प्रमाण पत्र (उत्तराधिकार के मामले में)
- विक्रय पत्र / रजिस्ट्री (खरीद-बिक्री में)
- वसीयतनामा (लागू होने पर)
- पहचान पत्र — आधार या मतदाता पहचान
- पासपोर्ट साइज़ फोटो
- सभी दस्तावेज़ की स्व-प्रमाणित प्रतिलिपि
🔄 नामांतरण की प्रक्रिया
आवेदन दर्ज करें
नज़दीकी CSC केंद्र या तहसील कार्यालय जाएँ। नामांतरण फॉर्म भरें।
दस्तावेज़ जमा करें
खसरा/B1, मृत्यु प्रमाण/विक्रय पत्र, पहचान पत्र।
नोटिस जारी होगा
तहसीलदार सभी संबंधित पक्षों को नोटिस भेजेगा।
सुनवाई
तहसीलदार के सामने अपना पक्ष रखें।
आदेश और नामांतरण
45 दिनों में नाम बदलकर नया खसरा जारी होगा।
आवेदन दर्ज करें
नज़दीकी CSC केंद्र या तहसील कार्यालय जाएँ। नामांतरण फॉर्म भरें।
दस्तावेज़ जमा करें
खसरा/B1, मृत्यु प्रमाण/विक्रय पत्र, पहचान पत्र।
नोटिस जारी होगा
तहसीलदार सभी संबंधित पक्षों को नोटिस भेजेगा।
सुनवाई
तहसीलदार के सामने अपना पक्ष रखें।
आदेश और नामांतरण
45 दिनों में नाम बदलकर नया खसरा जारी होगा।
⚠️ ध्यान रखें
- नामांतरण के लिए SLA — 45 दिन (CG भू-राजस्व संहिता धारा 110)।
- देरी होने पर SDM कार्यालय में शिकायत करें।
- किसी दलाल को पैसे देने की ज़रूरत नहीं — यह सेवा निःशुल्क है।