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महिला भूमि अधिकार
👩 महिला भूमि अधिकार

उत्तराधिकार

पिता की संपत्ति में बेटी का अधिकार

सभी बेटियाँ (पुत्री)पिता की संपत्ति के वारिसपरिवार के सदस्य

उत्तराधिकार — विस्तार से जानें

यह खंड बेटियों के पैतृक संपत्ति में उनके कानूनी अधिकारों पर केंद्रित है।

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के 2005 के संशोधन ने बेटियों को सहदायिक संपत्ति में जन्म से ही पुत्रों के समान अधिकार प्रदान किए हैं।

यहां जानें कि आप अपनी विरासत का दावा कैसे कर सकती हैं।

आपकी रक्षा करने वाले कानून

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 (संशोधन 2005)§6

यह कानून बेटियों को पैतृक संपत्ति में पुत्रों के समान अधिकार देता है।

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956§8

यह कानून बताता है कि किसी पुरुष की मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति का उत्तराधिकार कैसे होगा।

छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959प्रासंगिक धाराएं

यह संहिता भूमि के स्वामित्व के हस्तांतरण और रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया बताती है।

अगर आपके अधिकार का उल्लंघन हो — क्या करें?

01

जन्म प्रमाण पत्र

अपना जन्म प्रमाण पत्र प्राप्त करें।

02

पारिवारिक विवरण

पिता और परिवार के अन्य सदस्यों का विवरण इकट्ठा करें।

03

आवेदन पत्र

तहसील कार्यालय में उत्तराधिकार के लिए आवेदन करें।

04

दस्तावेज़ सत्यापन

आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन करवाएं।

05

नाम दर्ज कराना

संपत्ति रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवाएं।

विस्तृत जानकारी

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कोई सुन नहीं रहा? यहाँ शिकायत करें

तहसीलदार

जिलाधीश

राजस्व मंडल

उच्च न्यायालय

ज़रूरी सुझाव

अपने जन्म प्रमाण पत्र को संभाल कर रखें।

पिता की संपत्ति के सभी कागजात की जानकारी रखें।

परिवार के सदस्यों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखें।

कानूनी सलाह लेने में संकोच न करें।