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आदिवासी भूमि अधिकार
🌿 आदिवासी भूमि अधिकार

जनजातीय सुरक्षा और संरक्षण

आदिवासी पहचान और संस्कृति की सुरक्षा

सभी आदिवासी समुदायआदिवासी युवा और बुजुर्गपारंपरिक ज्ञान धारकआदिवासी संस्कृति के संरक्षक

जनजातीय सुरक्षा और संरक्षण — विस्तार से जानें

यह खंड आदिवासी समुदायों की पहचान, संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान की सुरक्षा से संबंधित कानूनों और प्रावधानों पर केंद्रित है।

इसमें आदिवासियों के शोषण को रोकने और उनकी विशिष्ट सामाजिक-सांस्कृतिक व्यवस्था को बनाए रखने के उपाय शामिल हैं।

हमारा उद्देश्य आदिवासी समुदायों को उनकी विरासत को संरक्षित करने और बाहरी प्रभावों से बचाने में मदद करना है।

आपकी रक्षा करने वाले कानून

संविधान (पांचवी अनुसूची)अनुच्छेद 244

अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों के सामाजिक और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए विशेष प्रावधान।

पेसा कानून, 1996धारा 4(m)

ग्राम सभा को लघु खनिजों के प्रबंधन और आदिवासियों के शोषण से सुरक्षा प्रदान करता है।

छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिताधारा 165(6)

आदिवासियों की भूमि को गैर-आदिवासियों को हस्तांतरण पर प्रतिबंध लगाता है, सिवाय कुछ शर्तों के।

अगर आपके अधिकार का उल्लंघन हो — क्या करें?

01

पहचान का सत्यापन

आदिवासी पहचान के प्रमाण पत्र प्राप्त करना।

02

शोषण से सुरक्षा

आदिवासियों के शोषण को रोकने के लिए कानूनी उपायों का उपयोग।

03

सांस्कृतिक संरक्षण

पारंपरिक कला, भाषा और रीति-रिवाजों का संरक्षण।

04

पारंपरिक ज्ञान

पारंपरिक ज्ञान की सुरक्षा और उसका उचित उपयोग।

05

अधिकारों की वकालत

अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना और सामूहिक कार्रवाई करना।

विस्तृत जानकारी

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कोई सुन नहीं रहा? यहाँ शिकायत करें

यदि आपकी भूमि का अवैध हस्तांतरण होता है, तो तुरंत राजस्व विभाग या न्यायालय में शिकायत करें।

शोषण या उत्पीड़न की स्थिति में पुलिस या आदिवासी कल्याण विभाग से संपर्क करें।

सांस्कृतिक अधिकारों के उल्लंघन के लिए आप मानवाधिकार आयोग में शिकायत कर सकते हैं।

जनजातीय मामलों के मंत्रालय से भी मार्गदर्शन प्राप्त किया जा सकता है।

ज़रूरी सुझाव

अपनी आदिवासी पहचान और भूमि अधिकारों के दस्तावेजों को सुरक्षित रखें।

अपने समुदाय की संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

किसी भी संदिग्ध भूमि हस्तांतरण या शोषण की रिपोर्ट तुरंत करें।

सामुदायिक एकता बनाए रखें और अपने अधिकारों के लिए मिलकर आवाज उठाएं।