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आदिवासी भूमि अधिकार
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आदिवासी भूमि अधिग्रहण

भूमि अधिग्रहण में आपके अधिकार

जिन आदिवासियों की भूमि का अधिग्रहण किया जाना हैआदिवासी समुदाय जो विस्थापित हो सकते हैंभूमि अधिग्रहण से प्रभावित परिवारसरकारी अधिकारी और परियोजना प्रस्तावक

आदिवासी भूमि अधिग्रहण — विस्तार से जानें

यह खंड आदिवासियों की भूमि के अधिग्रहण से संबंधित कानूनों और प्रक्रियाओं पर केंद्रित है, विशेष रूप से भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन अधिनियम, 2013 (LARR) के तहत।

इसमें आदिवासियों के भूमि अधिकारों की सुरक्षा, उचित मुआवजा और पुनर्वास सुनिश्चित करने के प्रावधान शामिल हैं।

हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में आदिवासियों के हितों की पूरी तरह से रक्षा हो।

आपकी रक्षा करने वाले कानून

भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन अधिनियम, 2013धारा 41

यह धारा अनुसूचित क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण के लिए ग्राम सभा की सहमति की आवश्यकता को अनिवार्य करती है।

पेसा कानून, 1996धारा 4(a)

ग्राम सभा को लघु खनिजों के साथ-साथ अन्य प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन का अधिकार देता है, जिसमें भूमि भी शामिल है।

संविधान (पांचवी अनुसूची)अनुच्छेद 244 + 5वीं अनुसूची

अनुसूचित क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण के लिए विशेष प्रक्रियाएं और राज्यपाल की सहमति आवश्यक हो सकती है।

अगर आपके अधिकार का उल्लंघन हो — क्या करें?

01

अधिसूचना

भूमि अधिग्रहण की प्रारंभिक अधिसूचना जारी करना।

02

ग्राम सभा से परामर्श

अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा से सहमति प्राप्त करना।

03

मुआवजा और पुनर्वास आकलन

प्रभावित आदिवासियों के लिए उचित मुआवजे और पुनर्वास पैकेज का आकलन।

04

मुआवजा अवार्ड

मुआवजे के अवार्ड की घोषणा।

05

पुनर्वास और कब्जा

पुनर्वास सुनिश्चित करने के बाद भूमि का कब्जा लेना।

विस्तृत जानकारी

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कोई सुन नहीं रहा? यहाँ शिकायत करें

यदि ग्राम सभा की सहमति नहीं ली गई है, तो आप अधिग्रहण को चुनौती दे सकते हैं।

मुआवजे की राशि से असंतुष्ट होने पर, आप अपीलीय प्राधिकारी के पास अपील कर सकते हैं।

पुनर्वास योजना के कार्यान्वयन में कमी होने पर आप संबंधित विभाग से शिकायत कर सकते हैं।

कानूनी सहायता के लिए आप आदिवासी अधिकार संगठनों या वकीलों से संपर्क कर सकते हैं।

ज़रूरी सुझाव

भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के बारे में पूरी जानकारी रखें।

ग्राम सभा की बैठकों में सक्रिय रूप से भाग लें और अपनी सहमति या असहमति व्यक्त करें।

अपने मुआवजे और पुनर्वास के अधिकारों के बारे में स्पष्ट रहें।

सभी संचार और दस्तावेजों का रिकॉर्ड रखें।